केंद्र सरकार ने शनिवार को मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को लेकर नया आदेश जारी किया है। वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, शेयरचैट, जियोचैट, अराटाई और जोश जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स मोबाइल में एक्टिव सिम कार्ड के बिना नहीं चल पाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे साइबर धोखेबाजों का पता लगाने में मदद मिलेगी। दूरसंचार विभाग के आदेश में कहा गया है कि मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स यह तय करें कि एप तभी चलेगा, जब यूजर की रजिस्टर्ड सिम उस मोबाइल में एक्टिव होगी। इतना ही नहीं ‘सिम बाइंडिंग’ के तहत अगर मोबाइल से सिम निकाल ली जाती है तो वॉट्सएप और बाकी दूसरे मैसेजिंग एप बंद हो जाएंगे। वेब ब्राउजर यानी लैपटॉप या डेस्कटॉप के जरिए लॉगिन करने वाले यूजर के लिए भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को हर छह घंटे में यूजर को लॉगआउट करना होगा। इसके बाद क्यूआर कोड के जरिए ही लॉगिन हो सकेगा। मैसेजिंग एप के लिए नियम से जुड़े सवाल-जवाब सवाल- अभी मोबाइल में ये एप कैसे चलाए जाते हैं? जवाब- अभी एप्स सिर्फ इंस्टॉलेशन के वक्त मोबाइल नंबर का एक बार वेरिफिकेशन करते हैं। इसके बाद एप सिम हटाने या नंबर बंद होने पर भी चलता रहता है। बस इंटरनेट कनेक्शन होना चाहिए। सवाल- नए बदलाव के बाद मोबाइल में इन एप के इस्तेमाल पर क्या फर्क पड़ेगा? जवाब- अब नंबर एक्टिवेट होने पर ही इन एप्स का प्रयोग किया जा सकेगा। यानी SIM बंद तो एप भी बंद। यह नंबर आप दोबारा अलॉट कराएं या नया नंबर लें बंद हुए एप्स पर इसे दोबारा रजिस्टर्ड करना होगा। कुल मिलाकर यूजर को एप चलाने के लिए अपना नंबर चालू रखना जरूरी होगा। इसे SIM-बाइंडिंग नियम भी कह रहे हैं। सवाल- नियम में बदलाव क्यों किया गया है? जवाब- अभी जारी फीचर टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी के लिए चुनौती बन रहा है क्योंकि देश के बाहर से साइबर-फ्रॉड करने के लिए इसका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। लगातार सिम-बाइंडिंग से स्पैम, फर्जी कॉल और ठगी पर लगाम लगने की उम्मीद है। सवाल- लैपटॉप-डेस्कटॉप यानी वेब लॉगिन पर कैसे चलाए जाते हैं? जवाब- इस समय वॉट्सऐप, टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग एप्स मोबाइल नंबर से एक बार लॉगिन करवाते हैं। शुरू में फोन पर ओटीपी या QR कोड स्कैन करना होता है। उसके बाद लैपटॉप या डेस्कटॉप पर एप बिना SIM डाले लगातार चलता रहता है। यानि फोन की SIM हट जाए या बंद भी हो जाए, तब भी वेब या डेस्कटॉप एप चलता रहता है और मैसेज भेजने-रीड करने में कोई दिक्कत नहीं होती। सवाल- नए नियम के बाद वेब लॉगिन में क्या बदलाव होगा? जवाब- नए नियम के बाद लैपटॉप-डेस्कटॉप पर मैसेजिंग एप लगातार लॉगिन नहीं रह सकेंगे। यूजर को हर छह घंटे में दोबारा QR कोड से लॉगिन करना होगा। एप तभी चलेगा जब फोन में एक्टिव SIM लगी होगी। अगर SIM बंद हो गई या हटा दी गई, तो कंप्यूटर और मोबाइल दोनों पर एप तुरंत बंद हो जाएगा। सवाल- क्या वॉट्सएप-टेलीग्राम-स्नैपचैट के अलावा किसी दूसरे एप के इस्तेमाल पर भी असर होगा? जवाब- हां, सभी ओटीपी बेस्ड मैसेजिंग, कॉलिंग और सोशल एप प्रभावित होंगे। इनमें वे एप शामिल हैं जिनमें वैरिफिकेशन जरूरी है। जैसे- सिग्नल, आईमैसेज, ट्रूकॉलर, ओटीपी से लिंक फेसबुक, इंस्टाग्राम, गूगल/एपल आईडी में नंबर बेस्ड रिकवरी और यूपीआई एप। मतलब, कोई भी एप जो मोबाइल नंबर पर आधारित लॉगिन देता है, वह इस नियम से प्रभावित होगा। सवाल- इस नियम को कब तक लागू किया जाएगा? जवाब- कंपनियों को नियम लागू करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। सभी ओवर-द-टॉप (ओटीटी) संचार प्लेटफॉर्म को 90 दिन में सिम-टु-डिवाइस बाइंडिंग नियम मानना होगा। सवाल- कंपनियों ने नियम नहीं माना तो क्या कार्रवाई होगी? जवाब- केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक कंपनियों को 120 दिन के भीतर इसको लेकर रिपोर्ट देनी होगी। नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। ——————— ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- वॉट्सएप क्यों, स्वदेशी एप अपनाएं सितंबर में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पहुंची, जिसमें देशभर में सोशल मीडिया अकाउंट्स को सस्पेंड या ब्लॉक करने के नियम बनाने की मांग की गई थी। इसे खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जोहो कंपनी के नए मैसेजिंग एप ‘अरट्टाई’ का जिक्र किया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा था कि हाल ही में एक देशी मैसेजिंग एप लॉन्च हुआ है, जिसे याचिकाकर्ता इस्तेमाल कर सकते हैं। पढ़ें पूरी खबर…
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