बजट सत्र का पहला दिन:राष्ट्रपति मुर्मू के भाषण से शुरू होगा सेशन, 2 अप्रैल तक चलेगा, 30 बैठकें होंगी; विपक्ष के हंगामे के आसार

18वीं लोकसभा का बजट सत्र बुधवार से शुरू होगा, जो 2 अप्रैल तक चलेगा। यह बजट सत्र दो हिस्सों में होगा। इसका पहला हिस्सा 28 जनवरी से 13 फरवरी तक और दूसरा हिस्सा 9 मार्च से 2 अप्रैल तक होगा। इस दौरान कुल 30 बैठकें होंगी। 28 जनवरी और 1 फरवरी को कोई शून्यकाल नहीं होगा। सत्र का पहला हिस्सा आज से लोकसभा और राज्यसभा की जॉइंट मीटिंग में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ शुरू होगा। इस सेशन में मोशन ऑफ थैंक्स पर बहस और यूनियन बजट पर चर्चा पर फोकस रहेगा। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए अस्थायी रूप से तीन दिन (2 से 4 फरवरी) तय हैं। संसद का बजट सत्र के हंगामेदार होने के आसार हैं। विपक्ष ने पिछले दो सत्रों (मानसून और शीतकालीन) में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर चर्चा और MGNREGA स्कीम की जगह आए VB-G RAM G कानून का विरोध करते हुए हंगामा किया था। सूत्रों के मुताबिक विपक्ष इस सेशन में भी SIR, VB-G RAM G कानून समेत भारत पर US द्वारा लगाए गए टैरिफ, फॉरेन पॉलिसी, एयर पॉल्यूशन का मुद्दा, इकोनॉमी, टीनएजर्स के लिए सोशल मीडिया पर बैन जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग करेगा। बजट सत्र में इन बिलों पर चर्चा संभव लोकसभा में 9 विधेयक लंबित हैं, जिनमें विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025, प्रतिभूति बाजार संहिता 2025 और संविधान (129वां संशोधन) विधेयक 2024 शामिल हैं। इन विधेयकों की वर्तमान में संसदीय स्थायी या प्रवर समितियां जांच कर रही हैं। 27 जनवरी- ऑल पार्टी मीटिंग हुई बजट सत्र से पहले ऑल पार्टी मीटिंग हुई। इसमें विपक्ष ने VB-G RAM G एक्ट और SIR पर चर्चा की मांग की, जिसे खारिज कर दिया गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इन मुद्दों पर दोनों सदनों में पहले ही बहस हो चुकी है और कानून पास होने के बाद उसे वापस नहीं लिया जा सकता। विपक्ष ने सरकारी कार्यसूची जारी न होने पर आपत्ति भी जताई, जिस पर सरकार ने सही समय पर जारी करने का भरोसा दिया। मीटिंग के बाद विपक्षी सांसदों की प्रतिक्रिया- ऑल पार्टी मीटिंग में विपक्ष की मांग 31 जनवरी 2025: राष्ट्रपति का अभिभाषण, सोनिया ने बेचारी कहा, राहुल ने बोरिंग; PM बोले- ये आदिवासियों का अपमान पिछले बजट सत्र 2025-26 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा के जॉइंट सेशन में 59 मिनट का अभिभाषण दिया था। उनके भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए सोनिया गांधी ने द्रौपदी मुर्मू के लिए बेचारी शब्द इस्तेमाल किया। वहीं राहुल ने भाषण को बोरिंग बताया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि राष्ट्रपति के लिए ऐसे बयान गरीबों और आदिवासियों का अपमान है। वहीं भाजपा ने इसे आदिवासी समाज का अपमान बताया था और माफी की मांग की थी। हालांकि प्रियंका ने बचाव करते हुए कहा था- ‘मेरी मां 78 साल की बुजुर्ग महिला हैं, उन्होंने बस इतना कहा कि ‘राष्ट्रपति ने इतना लंबा भाषण पढ़ा होगा, वह थक गई होंगी, बेचारी।’

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