गुरुग्राम में द्वारका एक्सप्रेसवे टोल प्लाजा पर छिपा बैठा कुख्यात गैंगस्टर रविंद्र देशवाल पुलिस के हत्थे चढ़ गया। इस इंटरस्टेट गैंगस्टर को पकड़ने के लिए दिल्ली क्राइम ब्रांच टीम ने पिछले 28 दिन में रोहतक, सोनीपत, दिल्ली और गुरुग्राम में 25 जगहों पर छापे मारे। आखिरकार 24 जनवरी को गुरुग्राम के आर्टेमिस अस्पताल के बाहर दिखाई देने पर पुलिस ने उसका पीछा किया। 20 किमी तक पीछा करने के बाद आरोपी द्वारका एक्सप्रेसवे टोल प्लाजा पर पकड़ा गया। वह दाे साल से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था। इस दौरान वह दिल्ली NCR के टोल प्लाजा पर पहचान छिपाकर अलग-अलग तरह की नौकरी करता रहा। जानिए कैसे डागा और गाठा बदमाशों के संपर्क में आया 10वीं तक पढ़ा लिखा
पुलिस पूछताछ में पता चला कि रविंद्र 10वीं तक पढ़ा है और उसका कोई आपराधिक बैकग्राउंड नहीं था। वह अपने गांव के एक अपराधी अशोक डोगरा के संपर्क में आया। अशोक के जरिए वह कृष्ण गाठा गैंग में शामिल हो गया। शुरुआत में उसने छोटी-मोटी लूटपाट की, लेकिन धीरे-धीरे वह गैंग का मुख्य शूटर बन गया। रंजिश में हत्या और दिल्ली के व्यापारी का अपहरण
गांव की आपसी रंजिश में हुई हत्याओं में भी उसका नाम आया। साल 2018 में रविंद्र और उसके साथियों ने दिल्ली के हरी नगर निवासी सुनील गुप्ता का अपहरण किया था। उन्होंने पीड़ित की कार छीनी, 50 हजार नकद लूटे और एटीएम से 40 हजार रुपए निकलवाए। इसके बाद पीड़ित को उत्तर प्रदेश के मुरादनगर में फेंक दिया था। मुरथल और इसराना शूटआउट
मुरथल और पानीपत के इसराना में उसने पुलिस टीम पर फायरिंग की और हत्या के प्रयास जैसे जघन्य अपराधों को अंजाम दिया। इसके अलावा मुरथल थाने में उसके खिलाफ रेप और जान से मारने की धमकी देने का भी मामला दर्ज है। जाल बिछाकर पुलिस ने पकड़ा
रविंद्र को पकड़ने के लिए DCP क्राइम ब्रांच हर्ष इंदौरा और ACP भगवती प्रसाद की देखरेख में इंस्पेक्टर पवन कुमार की एक विशेष टीम गठित की गई थी। इस टीम में एसआई राजा राम, एएसआई रमेश, एएसआई राहुल कुमार, हेड कॉन्स्टेबल अमित कुमार और कॉन्स्टेबल अशोक शामिल किए। पुलिस टीम को हेड कॉन्स्टेबल अमित और कॉन्स्टेबल अशोक ने उसका सुराग निकाला।