इलेक्शन कमीशन (EC) ने सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को पश्चिम बंगाल में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर हलफनामा दाखिल किया। EC ने कोर्ट में बताया कि बंगाल में SIR के दौरान लगातार राजनीतिक दखल जारी है। EC ने कहा- अन्य राज्यों में SIR की प्रक्रिया बिना किसी बड़ी घटना या रुकावट के पूरी हुई, लेकिन पश्चिम बंगाल की स्थिति अलग है। वहां चुनाव अधिकारियों के खिलाफ हिंसा हो रही है। उन्हें धमकियां मिल रही हैं। ऐसे हालात बन गए हैं जिनमें चुनाव अधिकारी काम करने में असमर्थ हैं।. EC ने आरोप लगाया कि बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) की शिकायतों पर लोकल पुलिस आमतौर पर FIR दर्ज करने से बचती रही। कई मामलों में जिला चुनाव अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही केस दर्ज हुए। राज्य सरकार ने जानबूझकर EC के निर्देशों का पालन नहीं किया। EC ने बताया कि 24 नवंबर 2025 को कोलकाता स्थित चीफ इलेक्शन ऑफिसर के दफ्तर में प्रदर्शनकारियों ने जबरन घुसने की कोशिश की, पुलिस बैरिकेड तोड़े, दफ्तर में तोड़फोड़ की और अधिकारियों की आवाजाही रोकी। इसके बावजूद भी प्रदर्शनकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। चुनाव आयोग बोला- बंगाल EC को सिर्फ Y कैटेगरी की सुरक्षा चुनाव आयोग ने हलफनामा में आगे कहा- केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा खतरे का आकलन किए जाने के बाद पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्शन ऑफिसर को Y कैटेगरी की सुरक्षा दी गई थी। वह देश के ऐसे एकमात्र चुनाव अधिकारी थे जिन्हें यह सुरक्षा प्रदान की गई। EC ने बताया कि सभी चुनौतियों के बावजूद BLOs ने 7.08 करोड़ से अधिक काउंटिंग फॉर्म जमा किए, जो कुल का 92.40% है। इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों की ओर से करीब 1.51 करोड़ नोटिस जारी किए गए। आयोग ने बताया कि एलिजिबिलिटी तय करने और त्रुटियों को सुधारने के लिए नोटिस फेज बेहद अहम है और इसे बिना डर या दबाव के पूरा किया जाना वोटर लिस्ट की शुचिता के लिए जरूरी है। आयोग ने कहा- चुनाव में 2025 की वोटर लिस्ट का इस्तेमाल नहीं हो सकता EC ने यह भी कहा कि इस साल बंगाल विधानसभा चुनाव में 2025 की वोटर लिस्ट का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। क्योंकि SIR के दौरान 58 लाख से ज्यादा मृत, स्थानांतरित और गैर-हाजिर वोटरों की पहचान की गई है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि SIR की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने EC से कहा था कि लॉजिकल गड़बड़ियों वाली लिस्ट में शामिल लोगों के नाम ग्राम पंचायत भवनों और ब्लॉक कार्यालयों में प्रदर्शित किए जाएं, ताकि वहां दस्तावेज और आपत्तियां जमा की जा सकें। बंगाल में SIR प्रक्रिया से जुड़ी खबरें… 4 फरवरी: ममता बोलीं- EC बंगाल को निशाना बना रहा, नाम मिसमैच पर दिए नोटिस वापस लिए जाएं सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मौजूद राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग के निशाने पर है। जो काम 2 साल में होना था, उसे 3 महीने में करवाया जा रहा है। सुनवाई के बाद CJI सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि असली लोग चुनावी सूची में बने रहने चाहिए। ममता की याचिका पर बेंच ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी से 9 फरवरी तक जवाब मांगा। पूरी खबर पढ़ें… 3 फरवरी : ममता बोली- EC ने 6 पत्रों का जवाब नहीं दिया इससे पहले ममता ने मंगलवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले SIR क्यों किया जा रहा है? चार राज्य बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम में चुनाव होने हैं। SIR तीन राज्यों में हो रहा है, लेकिन भाजपा-शासित असम में नहीं। क्योंकि वह ‘डबल इंजन’ राज्य है। ममता बनर्जी ने घुसपैठियों पर कहा कि ये लोग (BJP) घुसपैठियों की बात करते हैं लेकिन ये तो आपकी जिम्मेदारी है। बॉर्डर की रखवाली केंद्र की जिम्मेदारी है। ऐसे में घुसपैठ के लिए वही जिम्मेदार है। पूरी खबर पढ़ें… 2 फरवरी: ममता काली शॉल ओढ़कर मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलीं ममता बनर्जी ने सोमवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ काली शॉल ओढ़कर दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की थी। उनके साथ SIR प्रभावित 13 परिवार और TMC के नेता भी थे। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि ममता ने अपने मुद्दे CEC को बताए लेकिन उनका जवाब सुने बिना ही नाराज होकर चली गईं। मुलाकात के बाद ममता ने कहा, “मैं बहुत दुखी हूं। मैं दिल्ली की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हूं। मैंने आज तक ऐसा अहंकारी और झूठा चुनाव आयुक्त नहीं देखा। वह इस तरह से बात करते हैं जैसे वह जमींदार हों और हम नौकर। पूरी खबर पढ़ें… 28 जनवरी : ममता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी ममता बनर्जी ने 28 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को इस मामले में पक्षकार बनाया है। इससे पहले उन्होंने 3 जनवरी को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर SIR को मनमाना और त्रुटिपूर्ण बताते हुए रोकने की मांग की थी। 19 जनवरी : SC बोला- आम लोगों को असुविधा नहीं होनी चाहिए सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को लेकर निर्देश जारी करते हुए कहा था कि यह प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और आम लोगों को किसी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ सूची में शामिल मतदाताओं के नाम ग्राम पंचायत भवनों और ब्लॉक कार्यालयों में प्रदर्शित किए जाएं। कोर्ट ने यह भी नोट किया था कि राज्य में करीब 1.25 करोड़ मतदाता इस सूची में शामिल हैं। इसमें 2002 की मतदाता सूची से तुलना के दौरान माता-पिता के नाम में अंतर या उम्र से जुड़ी विसंगतियां पाई गई हैं। —————————— ये खबर भी पढ़ें… बंगाल में 21-40 की उम्र के बेरोजगारों को ₹1500 मिलेंगे, कर्मचारियों का DA 4% बढ़ा पश्चिम बंगाल में 21-40 साल की आयु वर्ग के बेरोजगार लोगों को 1,500 रुपए का मासिक भत्ता दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि अगर उनकी सरकार सत्ता में दोबारा आती है ते यह योजना 15 अगस्त से शुरू की जाएगी। सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले में डियरनेस अलाउंस(DA) में भी 4% की बढ़ोतरी की गई है। पूरी खबर पढ़ें…
Related Posts
गुरुग्राम के होटल में आई महिला की लाश मिली:दिल्ली से मेल फ्रेंड की बर्थडे पार्टी में आई, CCTV में दिखी; पुलिस बोली- नशे में गिरकर मौत
हरियाणा के गुरुग्राम में रविवार सुबह मेदांता अस्पताल के पास दिल्ली की महिला की लाश मिली है। लाश झाड़ियों में…
होली से पहले ही 3 राज्यों में लू, अगले हफ्ते मप्र समेत 5 और राज्यों में थपेड़े
होली के पहले ही गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के कई इलाके लू की चपेट में हैं। गुजरात-राजस्थान के एक दर्जन…
ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने 15 ब्रह्मोस दागीं:पाकिस्तान के 11 एयरबेस को निशाना बनाया; रक्षामंत्री राजनाथ आज भुज एयरफोर्स स्टेशन जाएंगे
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी एयरबेसों पर 15 ब्रह्मोस दागी थीं। न्यूज एजेंसी ANI से ये बात डिफेंस एस्टैबलिशमेंट…